ब्याह समै जैसे दुहूं ओर गाईअति गीत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

ब्याह समै जैसे दुहूं ओर गाईअति गीत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

ब्याह समै जैसे दुहूं ओर गाईअति गीत
एकै हुइ लभति एकै हानि कानि जानीऐ ।
दुहूं दल बिखै जैसे बाजत नीसान तान
काहू कउ जै काहू कउ पराजै पहचानीऐ ।
जैसे दुहूं कूलि सरिता मै भरि नाउ चलै
कोऊ माझिधारि कोऊ पारि परवानीऐ ।
धरम अधरम करम कै असाध साध
ऊच नीच पदवी प्रसिध उनमानीऐ ॥३८२॥

Leave a Reply