बौद्ध काल-भारत-भारती (अतीत खण्ड) -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Bharat-Bharti( Ateet Khand)

बौद्ध काल-भारत-भारती (अतीत खण्ड) -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Bharat-Bharti( Ateet Khand)

 

भारत-गगन में उस समय फिर एक वह झण्डा उड़ा-
जिसके तले, आनन्द से, आधा जगत आकर जुड़ा ।
वह बौद्धकालिक सभ्यता है विश्व भर में छा रही,
अब भी जिसे अवलोकने को भूमि खोदी जा रही ! ।। २०४।।

वर्णन विदेशी यात्रियों ने उस समय का जो दिया,
पढ़कर तथा सुन कर उसे किसने नहीं विस्मय किया ?
बनते न विद्या प्राप्त कर ही वे यहाँ बुधवर्य्य थे-
श्री भी यहाँ की देख कर करते महा आश्चर्य थे ।।२०५||

तब भी कला-कौशल यहाँ का था जगत के हित नया,
है फ़ाहियान विलोक जिसको मुग्ध होकर कह गया-
“यह काम देवों का किया है, मनुज कर सकते नहीं–
दृग देखकर जिसको कभी श्रम मान कर थकते नहीं !”।। २०६।।

 

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