बोस्की के लिए-त्रिवेणी -गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

बोस्की के लिए-त्रिवेणी -गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

कुछ ख़्वाबों के ख़त इन में , कुछ चाँद के आईने ,
सूरज की शुआएँ हैं
नज़मों के लिफाफ़ों में कुछ मेरे तजुर्बे हैं,
कुछ मेरी दुआएँ हैं
निकलोगे सफ़र पर जब यह साथ में रख लेना,
शायद कहीं काम आएँ

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