बोले कि अपनी फ़ौज -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

बोले कि अपनी फ़ौज -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

बोले कि अपनी फ़ौज नेहायत है मुख़्तसर ।
घेरे हुए हैं हम को हज़ारों ही अहल-ए-शर ।
छोड़ेंगे अपने आप को दुश्मन के रहम पर ।
उस में भी अपनी इज़्ज़त-ओ-अज़मत का है ख़तर ।
चिड़ियों को आज भी मैं लड़ा दूंगा बाज़ से ।
कुछ फ़ायदा नहीं है मगर तरक-ओ-ताज़ से ।

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