बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं-गीत जाँ निसार अख़्तर-जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं-गीत जाँ निसार अख़्तर-जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

दर्द-ए-दिल दर्द-ए-वफ़ा दर्द-ए-तमन्ना क्या है
आप क्या जानें मोहब्बत का तकाज़ा क्या है

बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं
आप माने या न माने मेरे क़ातिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

आप से शिकवा है मुझ को ग़ैर से शिकवा नहीं
जानती हूँ दिल में रख लेने के क़ाबिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

साँस लेती हूँ तो यूँ महसूस होता है मुझे
जैसे मेरे दिल की हर धड़कन में शामिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

ग़म नहीं जो लाख तूफ़ानों से टकराना पड़े
मैं वो कश्ती हूँ कि जिस कश्ती का साहिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं
आप माने या न माने मेरे क़ातिल आप हैं
बेमुरव्वत बेवफ़ा

(सुशीला)

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