बेड़ा तू, दरियाव तू, तुही वार, तुहि पार-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai 

बेड़ा तू, दरियाव तू, तुही वार, तुहि पार-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

बेड़ा तू, दरियाव तू, तुही वार, तुहि पार ।
तुही तरावे, तरे तू, तुहि मध डूबनहार ॥
तुहि मध दूबनहार, सर्वलीला है तेरी ।
तुही घंटा, तुहि शंख, तुही रणसिंहा भेरी ॥
कह गिरिधर कविराय, तुही बस्ती तुहि खेड़ा ।
तुहि नावक, तुहि नीर, तुही पतवारी बेड़ा ॥

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