बुरा कुछ न मेरा ग़रीबी करे-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

बुरा कुछ न मेरा ग़रीबी करे-ग़ज़लें-ख़याल लद्दाखी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Khayal Ladakhi

बुरा कुछ न मेरा ग़रीबी करे
पशेमां फ़क़त बदनसीबी करे

रहें फ़ासले दरमयां उम्र भर
कोई ख़ुद से कितना क़रीबी करे

कोई दर्द दे कर गया उम्र का
कोई उम्र भर को तबीबी करे

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