बुढ्ढन शाह दी अरज़ोई-कविताएं-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

बुढ्ढन शाह दी अरज़ोई-कविताएं-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सुत्ते नूं आ जगाके, हिरदे परीत पाके,
मोए नूं जी जिवाके, ढट्ठे नूं गल लगाके,
अपना बना के साईं, सानूं न छड्ड जाईं,
मिलके असां गुसाईं बिरहों न हुन दिखाईं,
चरनीं जि आप लाया, रस प्रेम दा चखाया,
दास आपना बनाया, विच्छुड़ न हुन गुसाईं !

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