बीत जैहै बीत जैहै जनमु अकाजु रे- शब्द-रागु जैजावंती महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

बीत जैहै बीत जैहै जनमु अकाजु रे- शब्द-रागु जैजावंती महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

बीत जैहै बीत जैहै जनमु अकाजु रे ॥
निसि दिनु सुनि कै पुरान समझत नह रे अजान ॥
कालु तउ पहूचिओ आनि कहा जैहै भाजि रे ॥1॥रहाउ॥
असथिरु जो मानिओ देह सो तउ तेरउ होइ है खेह ॥
किउ न हरि को नामु लेहि मूरख निलाज रे ॥1॥
राम भगति हीए आनि छाडि दे तै मन को मानु ॥
नानक जन इह बखानि जग महि बिराजु रे ॥2॥4॥1352॥

This Post Has One Comment

Leave a Reply