बीता एक अल्पविराम, फिर बदल गया मौसम-अल्पविराम-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

बीता एक अल्पविराम, फिर बदल गया मौसम-अल्पविराम-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

स्मृतियों के घरौंदे आँधी झेलते रहे
उड गया यौवन हम धूल देखते रहे
अकेले ही आंखे फाड़े बाँट जोहते रहे
नहीं लौटे वे दिन, समय तोड़ गया जीवन निर्मम
बीता एक अल्पविराम, फिर बदल गया मौसम

न वह बात रही न सजी फिर कोई रात
‘अब नहीं’ की चीख दिखा गयी बिसात
दिशाएँ बदलीं, छूट गया बरसों का साथ
कड़की दामिनी, और प्रणय तोड़ गया भ्रम
बीता एक अल्पविराम, फिर बदल गया मौसम

पहले वही क्षितिज थी आज नहीं कोई पास है
हाथ भर की दूरी भी अब केवल आभास है
आँखों मे इतिहास मूँदे यह कैसा अंधा प्रवास है
अब नहीं कोई व्याकुल यहाँ चाहे निकाल जाये दम
बीता एक अल्पविराम, फिर बदल गया मौसम

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