बिसरि गई सभ ताति पराई-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

बिसरि गई सभ ताति पराई-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

बिसरि गई सभ ताति पराई ॥
जब ते साधसंगति मोहि पाई ॥१॥ रहाउ ॥
ना को बैरी नही बिगाना सगल संगि हम कउ बनि आई ॥१॥
जो प्रभ कीनो सो भल मानिओ एह सुमति साधू ते पाई ॥२॥
सभ महि रवि रहिआ प्रभु एकै पेखि पेखि नानक बिगसाई ॥3॥8॥1299॥

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