बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

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बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना जेते करम कमाहि ॥
बिनु सतिगुर सेवे ठवर न पावही मरि जमहि आवहि जाहि ॥
बिनु सतिगुर सेवे फिका बोलणा नामु न वसै मनि आइ ॥
नानक बिनु सतिगुर सेवे जम पुरि बधे मारीअहि मुहि कालै उठि जाहि ॥1॥552॥

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