बाल कविता -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Baal Kavitayen Part 2

बाल कविता -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Baal Kavitayen Part 2

कुदरत का वरदान हैं बच्चे

कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ-बाप की जान हैं बच्चे,
इनके मन भगवान् है बस्ता,
फ़िर कैसे शैतान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे ।

हर देश का है भविष्य इनसे,
पूछलो जाकर मर्ज़ी जिनसे,
फ़र्क किया ना इनमें किसी ने,
सारे एक समान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ-बाप की जान हैं बच्चे ।

बच्चा होना हर कोई चाहे,
पर मुश्किल बच्चों की राहें,
पैदा होने से लेकर अब तक,
बढ़ते नहीं आसान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ-बाप की जान हैं बच्चे ।

बच्चों पर बोझा ना डालो,
बच्चों को अच्छे से पालो,
ध्यान रखो हर वक़्त उनका,
क्यूंकि अभी नादान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ-बाप की जान हैं बच्चे ।

आसमान और तारे

रात में देखो ख़ूब नज़ारे,
आसमान और ढेरों तारे,
कुछ चलते,
कुछ रुके हुए,
चमक रहे हैं लगते प्यारे,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे,
आसमान और ढेरों तारे ।

सूरज निकला गायब होते,
बड़े-बड़े और छोटे-छोटे,
कैसे लटके,
रहते हैं ये,
रात को इनको देख निहारें,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे,
आसमान और ढेरों तारे ।

आभा इनकी बहुत निराली,
ठंडी-ठंडी किरणों वाली,
टूट के गिरें,
मेरी झोली,
कैसे नीचे हम उतारें,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे,
आसमान और ढेरों तारे ।

आकृतियां भी ये बनाते,
ध्रुव तारे के साथ हो जाते,
इनके ऊपर,
बैठ जाऊं मैं,
जाऊं पर किसके सहारे,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे,
आसमान और ढेरों तारे ।

एक खिलौना मुझको ले दो

मैंने भी तो खेलना होता,
घर में हूँ मैं ही इकलौता,
मुझको मेरी खुशियां दे दो,
एक खिलौना मुझको ले दो ।

छुट्टी वाले दिन खेलूंगा,
करके सकूल का काम,
खेल कूदकर माँ की गोदी,
में करना आराम,
अव्वल दर्जे पर आऊंगा,
अपनी कक्षा में देखो,
मुझको मेरी खुशियां दे दो,
एक खिलौना मुझको ले दो ।

तोड़ूंगा ना ये खिलौना,
रखूंगा मैं संभाल,
पढ़ लिखकर होशियार बनेगा,
आपका नन्हा बाल,
आपका कहना भी मानूंगा,
अवसर एक मुझे दो,
मुझको मेरी खुशियां दे दो,
एक खिलौना मुझको ले दो ।

देश की बेटियों के नाम

मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो,
मैं जीना चाहती हूँ,
मुझे बाहर आने दो,
मैं एक छोटी गुड़िया हूँ,
क्या है कसूर मेरा,
इस दुनियां में आकर,
कुछ कर दिखाने दो ।

मैं पढूंगी लिखूंगी,
बेटों की तरह,
मैं भी तो प्राणी हूँ,
तुम समझो तो ज़रा,
मुझे ज़िन्दग़ी जीने का,
अब हक जताने दो,
मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो ।

मुझसे संसार चले,
मेरा चलना मुश्किल,
तो कौन निकलेगा,
इस बात का हल,
चलो मुझको ही मेरी,
किस्मत आजमाने दो,
मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो ।

तुम क्यों देते हो,
बेटों को हक ज़्यादा,
मेरी नारी शक्ति का,
मत टूटने देना धागा,
अपनी हस्ती को यशु,
मुझे ही बचने दो,
मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो ।

मेरा साईकल मेरा साथी

मेरा साईकल मेरा साथी,
नरम – नरम है इसकी काठी,
स्कूल मैं इसपे जाता हूँ,
धीरे – धीरे चलाता हूँ,
छुट्टी होते ही घर आऊं,
आते – आते ख़ूब चलाऊँ,
पूरी इसकी रखूँ संभाल,
घंटी बजे तो निकले ताल,
इसको धोते पिता जी रोज़,
इसके साथ है मौज ही मौज,
जिसने साईकल है बनाई,
उसकी करते हैं ख़ूब बढाई,
कम है दाम आसान चलाना,
बड़ा सुखद है आना – जाना,
हम बच्चों की खेल प्यारी,
अच्छी है साईकल की सवारी ।

अच्छी किताबें अच्छी मित्र

अच्छी किताबें अच्छी मित्र,
अच्छा ज्ञान अच्छा चरित्र,
अध्यापक हैं गुरु हमारे,
पूजनीय हमारे विप्र,
अच्छी किताबें अच्छी मित्र,
अच्छा ज्ञान अच्छा चरित्र ।

जहाँ से मिले शिक्षा लेलो,
अंधकार को और ना झेलो,
असत्य से चलो सत्य की ओर,
रात ढली तो आ गई भोर,
अच्छे मित्रों की संगत,
अच्छी बातों का ही ज़िक्र,
अच्छी किताबें अच्छी मित्र,
अच्छा ज्ञान अच्छा चरित्र ।

शिक्षा देती पढ़ो कहानी,
जिसमें ना हो राजा रानी,
बुराई के आगे ना है झुकना,
चलते गिरते फ़िर से उठना,
चारों तरफ़ हो ज्ञान की खुशबू,
जैसे महक खिलारे इत्र,
अच्छी किताबें अच्छी मित्र,
अच्छा ज्ञान अच्छा चरित्र ।

सुबह – सुबह जल्दी से उठो,
माता – पिता के आगे झुको,
उनका आशीर्वाद लेकर,
ख़ुश होंगे वे ये देखकर,
बच्चे हैं नादान हमारे,
ये सोच ना करेंगे फ़िक्र,
अच्छी किताबें अच्छी मित्र,
अच्छा ज्ञान अच्छा चरित्र ।

माँ मुझे मरने मत देना

मैं बेटी हूँ क्या इसी लिए,
मुझे गर्भ में ही मारा जाता,
मुझ जैसी नन्ही जान को,
क्यों पूजें समझ के माता,
हाथ पकड़कर रखना मेरा,
बिछड़ने मत देना,
माँ मुझे मरने मत देना ।

तो क्या हुआ लड़की हूँ,
लड़कों से हूँ कम नहीं,
मुझे बचाना हाथ है तेरे,
इतना भी क्या दम नहीं,
ऐसा कहर तू मेरे ऊपर,
करने मत देना,
माँ मुझे मरने मत देना ।

कसूर बतादो क्या है मेरा,
कातिलों ने क्यों मुझको घेरा,
लड़कियों को भी हक़ मिले,
जागो अब तो हुआ सवेरा,
अपने दिल को इनके डर से,
डरने मत देना,
माँ मुझे मरने मत देना ।

हर क्षेत्र में लड़कियां भी हैं,
मानो जैसे लड़कियां ही हैं,
अपने खोलो अंतर चक्षु,
उच्च पद और डिग्रियाँ ली हैं,
अपने बाग को अपने सामने,
उजड़ने मत देना,
माँ मुझे मरने मत देना ।

आओ सच्चाई के संग चलें

दिल में लेकर ये उमंग चलें,
आओ सच्चाई के संग चलें,
तंग दिलों को करें विशाल,
करते हुए साफ़ गंद चलें,
दिल में लेकर ये उमंग चलें,
आओ सच्चाई के संग चलें ।

भारत के स्वाभिमान की ख़ातिर,
भाई – बंधु की शान की ख़ातिर,
कोई दुखी, गरीब ना देश में हो,
मिलाकर अंग से अंग चलें,
दिल में लेकर ये उमंग चलें,
आओ सच्चाई के संग चलें ।

साक्षर भी सबको है बनाना,
हो अच्छी शिक्षा अच्छा खाना,
अड़चन ना आए रस्ते में,
सारा करके प्रबंध चलें,
दिल में लेकर ये उमंग चलें,
आओ सच्चाई के संग चलें ।

इस देश से भ्रष्टाचार मिटाएँ,
मिलकर त्रुटियाँ दूर भगाएँ,
दरवाजे दिल के खोल रखें,
ना ही रखकर बंद चलें,
दिल में लेकर ये उमंग चलें,
आओ सच्चाई के संग चलें ।

रोज़ एक कविता को गाओ

रोज़ एक कविता को गाओ,
गाकर झूमो गाते जाओ,
बड़ों का आदर करना सीखो,
ये ज़िन्दगी का पहला दाओ,
रोज़ एक कविता को गाओ,
गाकर झूमो गाते जाओ ।

सिर पर रहे जो बड़ों का हाथ,
ईश्वर भी दे उनका साथ,
अपने से छोटे हों दोस्त,
समझो इसको दूसरा पाठ,
अच्छी सब पहचान बनाओ,
ना मात – पिता का दिल दुखाओ,
रोज़ एक कविता को गाओ,
गाकर झूमो गाते जाओ ।

हाथों को धोकर भोजन करना,
खाकर भोजन फ़िर धो मलना,
हरी सब्ज़ियां ज़्यादा खानी,
खाकर भोजन धीरे चलना,
इन बातों को समझ जाओ,
गलतियों भी मत दौहराओ,
रोज़ एक कविता को गाओ,
गाकर झूमो गाते जाओ ।

कभी लेना मत अधूरी शिक्षा,
शिक्षा का मतलब है दीक्षा,
तभी समाज करेगा इज्ज़त,
शिक्षा है एक अमृत भिक्षा,
यशु जान का मान बढ़ाओ,
अपने देश को ख़ुद बचाओ,
रोज़ एक कविता को गाओ,
गाकर झूमो गाते जाओ ।

विचारधारा आगे सौंपना

भगवान को पाना हो,
पहले इंसान बनो,
जिसको प्यार करो,
उसका सम्मान करो,
गुरु के चरणों में,
शीश को जा धरो,
अगर है सफल होना,
तो पहले ज्ञान धरो,
अपनी नियत को,
शुद्धि से तुम भरो,
इन शब्दों को तुम,
गहन से सोचना,
यही विचारधारा,
आगे सौंपना ।

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