बाल कविताएँ -त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 1

बाल कविताएँ -त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 1

ऐसा वर दो

भगवन् हमको ऐसा वर दो।
जग के सारे सद्गुण भर दो॥

हम फूलों जैसे मुस्कायें,
सब पर प्रेम सुगंध लुटायें,
हम पर­हित कर खुशी मनायें,
ऐसे भाव हृदय में भर दो।
भगवन् हमको ऐसा वर दो॥

दीपक बनें, लड़े हम तम से,
ज्योर्तिमय हो यह जग हम से,
कभी न हम घबरायें गम से,
तन मन सबल हमारे कर दो।
भगवन्, हमको ऐसा वर दो॥

सत्य मार्ग पर बढ़ते जायें,
सबको हीं सन्मार्ग दिखायें,
सब मिलकर जीवन ­फल पायें,
ऐसे ज्ञान, बुद्धि से भर दो।
भगवन, हमको ऐसा वर दो॥

 

मीठी बातें

मीठे मीठे बोल सुनाती,
फिरती डाली डाली।
सब का ही मन मोहित करती
प्यारी कोयल काली ॥

बाग­ बाग में, पेड़­ पेड़ पर,
मधुर सुरो में गाती।
रुप नहीं, गुण प्यारे सबको
सबको यह समझाती॥

मीठी मीठी बातें कहकर
सब कितना सुख पाते।
मीठी ­मीठी बातें सुनकर
सब अपने हो जाते॥

कहती कोयल प्यारे बच्चो!
तुम भी मीठा बोलो।
प्यार भरी बातों से तुम भी
सब के प्यारे हो लो॥

 

उपवन के फूल

हम उपवन के फूल मनोहर
सब के मन को भाते।
सब के जीवन में आशा की
किरणें नई जगाते

हिलमिल-हिलमिल महकाते हैं
मिलकर क्यारी-क्यारी।
सदा दूसरों के सुख दें,
यह चाहत रही हमारी

कांटो से घिरने पर भी,
सीखा हमने मुस्काना।
सारे भेद मिटाकर सीखा
सब पर नेह लुटाना॥

तुम भी जीवन जियो फूल सा,
सब को गले लगाओ।
प्रेम-गंध से इस दुनियाँ का
हर कोना महकाओ॥

 

पेड़

पेड़ बहुत ही हितकारी हैं,
आओ, पेड़ लगायें।
स्वच्छ वायु, फल, फूल, दवाएँ
हम बदले में पायें॥

पर्यावरण संतुलित रखते,
मेघ बुलाकर लाते।
छाया देकर तेज धूप से
सबको पेड़ बचाते॥

कई तरह की और जरूरत
करते रहते पूरी।
सुगम बनातें सबका जीवन
होते पेड़ जरूरी॥

पेडों के इन उपकारों को
हम भी नहीं भुलायें।
आओ, रक्षा करें वनों की
आओं, पेड़ लगायें॥

 

पापा, मुझे पतंग दिला दो

पापा, मुझे पतंग दिला दो,
भैया रोज उड़ाते हैं।
मुझे नहीं छूने देते हैं,
दिखला जीभ, चिढ़ाते हैं॥

एक नहीं लेने वाली मैं,
मुझको कई दिलाना जी।
छोटी सी चकरी दिलवाना,
मांझा बड़ा दिलाना जी॥

नारंगी और नीली, पीली
हरी, बैंगनी,भूरी,काली।
कई रंग,आकार कई हों,
भारत के नक्शे वाली ॥

कट जायेंगी कई पतंगे,
जब मेरी लहरायेगी।
चंदा मामा तक जा करके
भारत­-ध्वज फहरायेगी॥

 

चिड़िया

घर में आती जाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

तिनके लेकर नीड़ बनाती,
अपना घर परिवार सजाती,
दाने चुन चुन लाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

सुबह सुबह जल्दी जग जाती,
मीठे स्वर में गाना गाती,
हर दिन सुख बरसाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

कभी नहीं वह आलस करती,
मेहनत से वह कभी न डरती,
रोज काम पर जाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

हँसना, गाना कभी न भूलो,
साहस हो तो नभ को छूलो,
सबको यह सिखलाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

 

देश हमारा

सुखद, मनोरम, सबका प्यारा।
हरा, भरा यह देश हमारा॥

नई सुबह ले सूरज आता,
धरती पर सोना बरसाता,
खग-कुल गीत खुशी के गाता,
बहती सुख की अविरल धारा।
हरा, भरा यह देश हमारा॥

बहती है पुरवाई प्यारी,
खिल जाती फूलों की क्यारी,
तितली बनती राजदुलारी,
भ्रमर सिखाते भाई चारा।
हरा, भरा यह देश हमारा॥

हिम के शिखर चमकते रहते,
नदियाँ बहती, झरने बहते,
“चलते रहो” सभी से कहते,
सबकी ही आँखो का तारा।
हरा, भरा यह देश हमारा॥

इसकी प्यारी छटा अपरिमित,
नये नये सपने सजते नित,
सब मिलकर चाहे सबका हित,
यह खुशियों का आँगन सारा।
हरा, भरा यह देश हमारा॥

 

भोजन

आओ बच्चो, तुम्हें सिखायें
भोजन का विज्ञानं ।
भोजन से ही ताकत आती
भोजन से मुस्कान ।

कार्बोहाइड्रेड और विटामिन
भोजन से ही पाते,
खनिज, वसा, प्रोटीन मिलें
जब अच्छा भोजन खाते,
भोजन से ही जीवन चलता,
बचती सबकी जान ।
भोजन से ही ताकत आती
भोजन से मुस्कान ।

सदा संतुलित भोजन देता
पोषक तत्व जरूरी,
इस शरीर की सभी जरूरत
भोजन करता पूरी,
सही समय पर करते रहना
तुम बढ़िया जलपान।
भोजन से ही ताकत आती
भोजन से मुस्कान ।

अच्छा भोजन करके ही
रोगो से हम लड़ पाते,
मन को स्वस्थ बनाता भोजन
तब ढंग से पढ़ पाते,
प्यारे बच्चो, कभी न रहना
तुम इससे अनजान।
भोजन से ही ताकत आती
भोजन से मुस्कान ।

 

पढ़ना अच्छा रहता है

गाँव गाँव और नगर नगर।
गली गली और डगर डगर॥
चलो, सभी मिलकर जायें।
मिलकर सबको समझायें॥
अनपढ़ रहना ठीक नहीं।
अनपढ़ की कब पूछ कहीं॥
जो अनपढ़ रह जाता है।
जीवन भर पछताता है॥
लड़का हो या लड़की हो।
चलो, सिखायें सब ही को॥
हर कोई यह कहता है।
पढ़ना अच्छा रहता है॥
बिना-पढ़ा पछताता है।
पढ़ा-लिखा सुख पाता है॥
मिलकर विद्यालय जायें।
पढ़ लिख कर सब सुख पायें॥

 

मुर्गा बोला

मुर्गा बोला- मुन्ने राजा
सुबह हो गई, बाहर आजा
कभी देर तक सोना मत
कभी आलसी होना मत
पढ़ो, लिखो, जाओ स्कूल
इसमें कभी न करना भूल

 

आओ, मिलकर दीप जलाएँ

आओ, मिलकर दीप जलाएँ।
अंधकार को दूर भगाएँ ।।

नन्हे नन्हे दीप हमारे
क्या सूरज से कुछ कम होंगे,
सारी अड़चन मिट जायेंगी
एक साथ जब हम सब होंगे,

आओ, साहस से भर जाएँ।
आओ, मिलकर दीप जलाएँ।

हमसे कभी नहीं जीतेगी
अंधकार की काली सत्ता,
यदि हम सभी ठान लें मन में
हम ही जीतेंगे अलबत्ता,

चलो, जीत के पर्व मनाएँ ।
आओ, मिलकर दीप जलाएँ ।।

कुछ भी कठिन नहीं होता है
यदि प्रयास हो सच्चे अपने,
जिसने किया, उसी ने पाया,
सच हो जाते सारे सपने,
फिर फिर सुन्दर स्वप्न सजाएँ ।
आओ, मिलकर दीप जलाएँ ।।

 

वर्षा आई

रिमझिम रिमझिम वर्षा आई।
ठण्डी हवा बही सुखदाई ।।

बाहर निकला मेंढक गाता,
उसके पास नहीं था छाता,
सर पर बूँदें पड़ी दनादन
तब घर में लौटा शर्माता,
उसकी माँ ने डाँट लगाई।
रिमझिम रिमझिम वर्षा आई ।।

पंचम स्वर में कोयल बोली,
नाच उठी मोरों की टोली,
गधा रंभाया ढेंचू ढेंचू
सबको सूझी हँसी ठिठोली,
सब बोले अब चुपकर भाई ।
रिमझिम रिमझिम वर्षा आई।।

गुड़िया बोली – चाचा आओ,
लो, कागज़ लो, नाव बनाओ,
कंकड़ का नाविक बैठाकर
फिर पानी में नाव चलाओ,
नाव चली, गुड़िया मुसकाई ।
रिमझिम रिमझिम वर्षा आई ।।

 

चींटी

नन्हीं काली, हिम्मतवाली,
चींटी बड़ी निराली है ।
दौड़ लगाती, कभी न थकती,
वह कितनी बलशाली है ।।

बहुत अधिक मेहनत करती है,
लेकिन थोड़ा खाती है।
जब उसको गुस्सा आता है
हाथी से लड़ जाती है ।।

जल्दी जगती रोज सवेरे,
देर रात को सोती ।
खुद से अधिक भार ले जाती
बड़ी साहसी होती ।।

चींटी कहती – प्यारे बच्चो,
मिलकर कदम बढ़ाओ ।
मेहनत करो, न हिम्मत हारो,
जो चाहो वह पाओ।।

 

सूरज

बड़े सवेरे सूरज आता ।
किरणों से जग को चमकाता ।

जैसे हो सोने की थाली,
नभ में बिखरा देता लाली,
देख देख जन जन सुख पाता ।
बड़े सवेरे सूरज आता ।।

खुश हो होकर चिड़ियाँ गांतीं,
फूलों की क्यारी खिल जातीं,
उन फूलों पर भोंरा गाता ।
बड़े सवेरे सूरज आता ।।

बरसातों में छुप छुप जाता,
जाड़ों में कुछ ज्यादा भाता,
पर गर्मी में खूब सताता ।
बड़े सवेरे सूरज आता ।।

सब में भर देता है सपने,
सब लगते कामों में अपने,
सूरज है जीवन का दाता ।
बड़े सवेरे सूरज आता ।।

 

मीठे और रसीले आम

मीठे और रसीले आम, दादाजी के बाग़ में ।
हम जाते जब होती शाम, दादाजी के बाग़ में ।।

कच्चे और पके आमों से
झुकीं बाग़ की डाली,
रात और दिन करते रहते
दो माली रखवाली,

तोते आते रोज तमाम, दादाजी के बाग़ में ।
मीठे और रसीले आम, दादाजी के बाग़ में ।।

अच्छे लगते आम रसभरे
हम सब मिल कर खाते,
आम फलों का राजा होता
दादाजी समझाते,

नीलम,केसर, लँगड़ा आम, दादाजी के बाग़ में ।
मीठे और रसीले आम, दादाजी के बाग़ में ।।

आम बहुत गुणकारी होता
सेहत सही बनाता,
और आम के पत्तों से भी
रोग दूर हो जाता,

गुठली के मिल जाते दाम, दादाजी के बाग़ में ।
मीठे और रसीले आम, दादाजी के बाग़ में ।।

 

 नया वर्ष

नये वर्ष की नयी सुबह ने
रंग बिखराये नये नये ।
सब में नये नये सूरज ने
स्वप्न जगाये नये नये ।।

नयी उमंगें, नयी तरंगें,
नयी ताल,संगीत नया ।
सब में जगीं नयी आशाएं
नयी बहारें, गीत नया ।।

नयी चाह है, नयी राह है,
नयी सोच, हर बात नयी ।
नया जागरण, नयी दिशाएँ,
नयी लगन,सौगात नयी ।।

सब में नयी नेह-धारायें
लेकर आया वर्ष नया ।
नया लगा हर एक नज़ारा,
सब में छाया हर्ष नया ।।

 

नया सवेरा लाना तुम

टिक टिक करती घड़ियाँ कहतीं
मूल्य समय का पहचानो।
पल पल का उपयोग करो तुम
यह संदेश मेरा मानो ॥

जो चलते हैं सदा, निरन्तर
बाजी जीत वही पाते।
और आलसी रहते पीछे
मन मसोस कर पछताते॥

कुछ भी नहीं असम्भव जग में,
यदि मन में विश्वास अटल।
शीश झुकायेंगे पर्वत भी,
चरण धोयेगा सागर­जल॥

बहुत सो लिये अब तो जागो,
नया सवेरा लाना तुम।
फिर से समय नहीं आता है,
कभी भूल मत जाना तुम॥

 

अंतरिक्ष की सैर

नभ के तारे कई देखकर
एक दिन बबलू बोला।
अंतरिक्ष की सैर करें, माँ
ले आ उड़न खटोला॥

कितने प्यारे लगते हैं
ये आसमान के तारे।
कौतूहल पैदा करते हैं
मन में रोज हमारे॥

झिलमिल झिलमिल करते रहते
हर दिन हमें इशारे।
रोज भेज देते हैं हम तक
किरणों के हरकारे॥

कोई ग्रह तो होगा ऐसा
जिस पर होगी बस्ती।
माँ,बच्चों के साथ वहाँ
मैं खूब करुँगा मस्ती॥

वहाँ नये बच्चों से मिलकर
कितना सुख पाऊँगा।
नये खेल सिखूँगा मैं,
कुछ उनको सिखलाऊँगा॥

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