बाल कविताएँ -त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 4

बाल कविताएँ -त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 4

आओ, मिलकर खेलें खेल

आओ, मिलकर खेलें खेल ।
सारे मिलकर खेलें खेल ।।

मिलकर कदम बढ़ायेंगे,
आगे बढ़ते जायेंगे,
नहीं रुकेगी अपनी रेल ।
आओ, मिलकर खेलें खेल ।।

चोर सिपाही खेलेंगे,
सच्चे को ताकत देंगे,
पर झूठे को होगी जेल ।
आओ, मिलकर खेलें खेल ।।

तनिक नहीं घबरायेंगे,
शिखरों पर चढ़ जायेंगे,
बाधाओं को पीछे ठेल ।
आओ, मिलकर खेलें खेल ।।

तन, मन स्वस्थ बनायेंगे,
गीत खुशी के गायेंगे,
मिलकर दुःख भी लेंगे झेल ।
आओ, मिलकर खेलें खेल ।।

पिचकारी नयी दिलायी

फागुन आया, बनी होलिका,
फिर उसमें दी आग ।
सबके अंदर उठी उमंगें,
और बढ़ा अनुराग ।

रंग लगाकर गले मिले सब,
गालों मला गुलाल ।
ढोल नगाड़े बजा बजाकर
सबने किया धमाल ।।

चबूतरे पर रख पिचकारी
गयी भारती अंदर ।
पिचकारी ले चढ़ा पेड़ पर
काले मुँह का बंदर ।।

अमन, अनुज, अनुराग
और राघव नाचे दे ताली।
खिसियाकर रो पड़ी भारती,
मुँह पर छायी लाली ।।

दादाजी ने पुचकारी वह,
सब को डांट लगायी ।
फिर दुकान से एक नयी
पिचकारी उसे दिलायी ।।

मेला

सोनू मोनू गये शहर में,
वहाँ लगा था मेला ।
सजी हुई थीं सभी दुकानें,
लगे हुए थे ठेला ।।

चाट पकौड़ी, पानी पूरी,
आइस्क्रीम, मिठाई ।
खट्टी मीठी गोल रसभरी
दोनों ने मिल खाई ।।

रंग बिरंगे गुब्बारों ने
उनको खूब लुभाया ।
जादूगर का खेल देखकर
मन में अचरज आया ।।

वहाँ हँसाता घूम रहा था
लाल टोप का जोकर ।
मेले से घर वापस आये
वे दोनों खुश होकर ।।

सूरज और कलियाँ

सात रंग के घोड़ों पर चढ़
सजधज सूरज आया ।
उपवन में सोयी कलियों को
उसने यूँ समझाया ।।

प्यारी कलियों आँखे खोलो,
उठा रात का पहरा ।
सबका ही मन मोह रहा है
यह शुभ समय सुनहरा ।।

सबको ही सुख बाँट रही है
मनभावन पुरवाई ।
चंचल पंख हिलाती तितली
प्यार बाँटने आई ।।

कलियों ! तुम मुस्कान बिखेरो,
हँसकर साथ निभाओ ।
औरों को कुछ खुशी बाँटकर
जीवन का सुख पाओ ।।

जीवन सुगम बनायें

हिलमिल हिलमिल चाँद सितारे
रहते साथ गगन में ।
गाते और फुदकते पंछी
मिलकर रहते वन में ।।

रंग रंग के, ढंग ढंग के
सुमन साथ में खिलते ।
उपवन और मनोहर लगता
जब तितली दल मिलते ।।

घूम घूमकर, झूम झूम जब
सागर में मिल जातीं ।
और तरंगित होती नदियां
सागर ही कहलातीं ।।

हम भी आपस में मिलजुल कर
जीवन सुगम बनायें ।
हँसते गाते जीवन पथ पर
आगे बढ़ते जायें ।।

नई सदी के बच्चे

नई सदी के बच्चे हैं हम
मिलकर साथ चलेंगे ।
प्रगति के रथ को हम मिलकर
नई दिशाएं देंगे ।

जल, थल, नभ में काम करेंगे
जो चाहें पायेंगे ।
सदा राष्ट्र की विजय पताका
मिलकर फहरायेंगे ।।

हर कुरीति, हर आडम्बर को
मिलकर नष्ट करेंगे ।
सबके मन में नई उमंगें,
सपने नये भरेंगे ।।

नई सदी के बच्चे हैं हम,
नव प्रतिमान गढ़ेंगे ।
सबसे प्यारा देश हमारा,
सबको बतला देंगे ।।

गौरैया

घर में आई गौरैया ।
झूम उठा छोटा भैया ।।
गौरैया भी झूम गयी ।
सारे घर में घूम गयी ।।
फिर मुंडेर पर जा बैठी ।
फिर आंगन में आ बैठी ।।
कितनी प्यारी वह सचमुच ।
खोज रही थी शायद कुछ ।।
गौरैया ने गीत सुनाया ।
भैया दाना लेकर आया ।।
दाना रखा कटोरे में ।
पानी रखा सकोरे में ।।
फुर्र उड़ी वह ले दाना ।
सबने मन में सुख माना ।।

Leave a Reply