बाल कविताएँ -त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 3

बाल कविताएँ -त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 3

 

दीवाली

आयी दीवाली मनभावन
भाँति भाँति घर वार सजे।
जगमग जगमग हुई रोशनी
कितने बंदनवार सजे॥

दादा लाए कई मिठाई,
खील, बताशे भी लाए।
फुलझड़ियाँ, बम, चक्र, पटाखे
अम्मां ने ही मंगवाए॥

गुड़िया ने छोड़ी फुलझड़ियाँ,
शेष पटाखे भैया ने।
धूम धड़ाका हुआ जोर का,
डाँट लगाई मैया ने॥

सबने मिल की लक्ष्मी पूजा,
काली रजनी उजियाली।
कितनी रौनक कितनी मस्ती
फिर फिर आये दीवाली॥

 

प्रेम सुधा बरसायें

गुन गुन गुन गुन करता भौंरा
उपवन उपवन जाता।
कली-कली पर, फूल फूल पर
गीत मिलन के गाता॥

रंग, रुप, गुण धर्म अलग हैं
साम्य नहीं दिख पाता।
फिर भी भौंरा फूलों के संग
कितना नेह लुटाता॥

मस्ती में डूबा सा भौंरा
जैसे सबसे कहता।
मिलकर रहना इस दुनिया में
कितना सुखमय रहता॥

आओ, सीखे भौंरे से हम
मन के भेद मिटायें।
सुखमय बने सभी का जीवन
प्रेम-सुधा बरसायें॥

 

पानी

पानी से हर बूँद बनी है,
पानी का ही सागर ।
नभ में बादल दौड़ लगाते,
भर पानी की गागर॥

पानी से ही बहते झरने,
नदियाँ नाले बहते।
ताल-तलैया, झील, सरोवर
पानी से शुभ रहते॥

पानी से ही फसलें उगतीं,
हर वन उपवन फलता।
पानी से ही इस वसुधा पर
सबका जीवन चलता॥

आओ, बचत करें पानी की
पानी उत्तम धन है।
पानी से ही यह जग सुन्दर
पानी से जीवन है॥

 

गाड़ी

डैडी, तुम भी गाड़ी ले लो
सभी घूमने जायेंगे।
जब हौरन बोलेगा पीं पीं
राहगीर हट जायेंगे ॥

देखेंगे हिमगिरि के झरने,
चाट पकोड़ी खायेंगे।
पर डैडी बस यह मत कहना ­
जल्दी वापस आयेंगे॥

देवदार के पेड़ों के संग
फोटो कई खिचायेंगे।
जब लौटेंगे वापस घर को
चीज कई हम लायेंगे ॥

मम्मी, तुम क्या सोच रही हो,
पहनो बासंती साड़ी।
चलो संग डैडी के तुम भी,
आओ ले आयें गाड़ी॥

 

बादल

सागर से गागर भर लाते
बादल काले काले।
लाते साथ हवा के घोड़े
दम खम, फुर्ती वाले॥

कभी खेत में, कभी बाग में,
कभी गाँव में जाते।
कहीं निकलते सहमे सहमे,
कहीं दहाड़ लगाते॥

कहीं छिड़कते नन्हीं बूँदें,
कहीं छमा-छम पानी।
कहीं कहीं सूखा रह जाता
जब करते नादानी

जहाँ कहीं भी जाते बादल
मोर पपीहा गाते।
सब के जीवन में खुशियों के
इन्द्रधनुष बिखराते॥

बड़े प्यार से कहती धरती­
“आओ, बादल, आओ।
तुम अपनी जल की गागर से
सबकी प्यास बुझाओ॥”

 

बारिश

आसमान में बादल छाए ।
सूरज दादा नजर न आए ।।
छम छम छम छम बरसा पानी ।
राहगीर ने छतरी तानी ।।
फैल गई सुंदर हरियाली ।
हवा बही सुख देने वाली ।।
पत्ते, फूल, पेड़ मुसकाये।
चिड़ियों ने मिल गाने गाये ।।
झील भरी, नदिया लहराई ।
चाचा जी ने नाव चलाई ।।
खेल खेल बच्चे मुसकाये ।
ऐसी बारिश फिर फिर आये ।।

 

संकल्प

उठ उठ गिर गिर गिर गिर उठ उठ,
गिरि की गोदी से निकल निकल ।
मन में अविचल संकल्प लिये,
बहती नदिया कल-कल, कल-कल ।।

पथ में काँटे या फूल मिलें,
चाहे पत्थर राहें रोकें ।
चलती नदिया अपनी धुन में,
कितनी भी बाधाएं टोकें ।।

रुकती न कभी, थकती न कभी,
बढ़ती जाती हँसती गाती ।
दायें मुड़ती, बायें मुड़ती,
आखिर अपनी मंजिल पाती ।।

समझाती नदी सदा सबको,
तन मन में नई उमंग भरो ।
श्रम से सब कुछ मिल जाता है,
तुम भी मन में संकल्प करो ।।

हम भी परहित करना सीखें

सूरज अपनी नव-किरणों से
बिखरा देता जग में लाली ।
बूँदों के मोती बिखराकर
बादल फैलाता हरियाली ।।

धरती के उपकार असीमित
सबको दाना पानी देती ।
अपने आंचल के आश्रय में
सबके सारे दुःख हर लेती ।।

उपवन सदा सुगंध लुटाकर
सबकी सांसें सुरभित करता ।
खग-कुल मिलकर गीत सुनाता
सबके मन में खुशियां भरता ।।

हम भी परहित करना सीखें,
मिलकर सब पर नेह लुटायें ।
औरों के दुःख दर्द मिटाकर
इस धरती को स्वर्ग बनायें ।।

भला कौन है सिरजनहार

हर दिन सूरज को प्राची से,
बड़े सबेरे लाता कौन ?
ओस-कणों के मोहक मोती
धरती पर बिखराता कौन ?

कौन बताता सुबह हो गयी,
कलिकाओ मुस्काओ तुम ।
अलि तुम प्रेम-गीत दुहराओ,
पुष्प सुगंध लुटाओ तुम ।।

बहो झूमकर ओ पुरवाई
झूम उठें जन जन के तन ।
किसके कहने पर गा गा कर
खग सुखमय करते जीवन ।।

इस लुभावने सुन्दर जग का
भला कौन है सिरजनहार ।
उस अनाम को शत शत वंदन,
उसका बार बार आभार ।।

साहस

मत अन्धकार से डरो कभी,
जुगनू सा स्वयंप्रकाश बनो ।
काँटों से भला वितृष्णा क्यों
फूलों की मधुर सुवास बनो ।।

चिंता करने की बात नहीं,
यदि आ जायें रातें काली ।
आशा का चन्दा उगने पर
फैलेगी मनहर उजियाली ।।

तूफान मिलेंगे जीवन में,
पर तनिक नहीं घबराना है ।
साहस की नौका साथ लिए
आगे ही बढ़ते जाना है ।।

साहस वह एक परम गुण है,
जो जीवन श्रेष्ठ बनाता है ।
साहस ही है वह महामंत्र,
जो जीत सदैव दिलाता है ।।

हे वीर-सपूतो उठो, उठो,
साहस से तन-मन-प्राण भरो ।
चाहो तो सब कुछ संभव है,
उत्कर्ष करो, उत्कर्ष करो ।।

हम हैं वीर सिपाही

अटल इरादे, फौलादी तन, साहस, चिर तरुणाई ।
थर्राते हैं दुश्मन सारे, जब हम लें अंगडाई ।।
नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे, हम हैं वीर सिपाही ।

हम रण में अड़ जाने वाले,
सिंहों से लड़ जाने वाले,
गीत विजय के गाने वाले,
जब दुश्मन ने शीश उठाया, हमने धूल चटाई ।
नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे, हम हैं वीर सिपाही ।।

हम रिपु दल में बढ़ते जाते,
तूफानों से हम टकराते,
पर्वत हमको रोक न पाते,
हम नभ तक की दूरी नापें, सागर की गहराई ।
नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे, हम हैं वीर सिपाही ।।

हम हैं सफल मनोरथ वाले,
हमें न रोकें बरछी भाले,
हमने नाथे विषधर काले,
हमसे लड़कर रिपु पछताए, देते फिरे दुहाई ।
नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे, हम हैं वीर सिपाही ।।

देश प्रेम में जीते मरते,
बलिदानों से कभी न डरते,
मन में जोश अपरिमित भरते,
विषम परिस्थितियों में चलकर हमने मंजिल पाई ।
नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे, हम हैं वीर सिपाही ।।

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