बाबे डिठी पिरथमी नवै खंड जिथै तक आही ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

बाबे डिठी पिरथमी नवै खंड जिथै तक आही ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

बाबे डिठी पिरथमी नवै खंड जिथै तक आही ॥
फिर जा चड़े सुमेर पर सिध मंडली द्रिशटी आई ॥
चौरासीह सिध गोरखादि मन अन्दर गणती वरताई ॥
सिध पुच्छन सुन बाल्या कौन शकत तुह एथे ल्याई ॥
हउं जप्या परमेशरो भाउ भगत संग ताड़ी लाई ॥
आखन सिध सुन बाल्या अपना नां तुम देहु बताई ॥
बाबा आखे नाथ जी नानक नाम जपे गत पाई ॥
नीच कहाय ऊच घर आई ॥28॥

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