बाबा आया तीरथीं तीरथ पुरब सभे फिर देखै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

बाबा आया तीरथीं तीरथ पुरब सभे फिर देखै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

बाबा आया तीरथीं तीरथ पुरब सभे फिर देखै ॥
पूरब धरम बहु करम कर भाउ भगति बिन किते न लेखै ॥
भाउ न ब्रहमे लिख्या चार बेद सिंम्रति पड़्ह देखै ॥
ढूंडी सगली पिरथमी सतिजुग आदि दुआपर त्रेतै ॥
कलिजुग धुंधूकार है भरम भुलाई बहु बिधि भेखै ॥
भेखीं प्रभू न पाईऐ आप गवाए रूप न रेखै ॥
गुरमुख वरन अवरन होइ निव चलै गुरसिख विसेखै ॥
तां कुछ घाल पवै दर लेखै ॥25॥

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