बादल-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

बादल-कविता-करन कोविंद -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karan Kovind

डूबती है स्निग्ध – तरू-तल पात
डूबती है एक प्रसिध्द-पद दल- प्रभात
क्या छा गयी क्षितिज पर एक रोर
क्या भा गयी उस दल-भेश को मरोर
छेक लेती है घटाये इस नीले आकाश को
छेक लेता है उस चमकते दिनकाश को
जो आ गया एक हर्ष-जल – धीर लेकर
जो बरस जायेगा धरा को नत-भीन कर

उस बादल की मनसा को
है कौन नही पहचानता
डूबा देगा ग्राम – कुल
डूबा देगा धर – मुकुल

म्लान-रूप – छवि जलधर आता उधर
बूंद – बूंद मे छिटकन भर आता उधर
कूल – कूल क्या शूल शूल बरसता उधर
न दबदबा प्रकृति – कृत – विश्वकर्मा का
न दबदबा उस रज-कण विकिरण धारक का
छा गया विन आज्ञा के एक अधिकार से
देख लो पागल पथिक आगया एक जोश से

उस बादल कि मनसा को
है कौन नही जानता
बिखेर देगा काला दूकूल
भर देगा हर एक कूल

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