बहु वाटीं जग्ग चलियां जब ही भए महंमद यारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

बहु वाटीं जग्ग चलियां जब ही भए महंमद यारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

बहु वाटीं जग्ग चलियां जब ही भए महंमद यारा ॥
कौम बहत्तर संग कर बहु बिधि बैर बिरोध पसारा ॥
रोझे ईद नमाझ कर करमी बन्द किया संसारा ॥
पीर पकम्बर औलीऐ ग़ौस कुतब बहु भेख सवारा ॥
ठाकुर दुआरै ढाहकै तेह ठउड़ीं मसीत उसारा ॥
मारन गउ गरीब धरती उपर पाप बिथारा ॥
काफर मुलहद इरमनी रूंमी जंगी दुशमन दारा ॥
पापे दा वरत्या वरतारा ॥20॥

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