बहुत दिनानके अवधि आस-पास परे-सुजानहित -घनानंद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghananand 

बहुत दिनानके अवधि आस-पास परे-सुजानहित -घनानंद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ghananand

बहुत दिनानके अवधि आस-पास परे
खरे अरवरनि भरे हैं उठि जान को
कहि कहि आवन संदेसौ मन भावन को
गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को
झूठी बतियानि की पत्यानि तै उदास ह्वै कें
अब न धिरत घन आनंद निदान को।
अधर लगे हैं आनि करिकै पयान प्रान
चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को।

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