बस इतना सा ख्वाब है-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

बस इतना सा ख्वाब है-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

जो भी चाहूं वो मैं पाऊं
जिंदगी में जीत जाऊं
चांद तारे तोड़ लाऊं
सारी दुनिया पर मैं छाऊं
बस इतना सा ख्वाब है

यार तू भी सुन ज़रा, आरजू मेरी है क्या
मैं क्या बन जाना चाहता हूं
मैं कहां ख़राब हूं, मैं तो लाजवाब हूं
मैं ये मनवाना चाहता हूं
मान जा ऐ खुदा
इतनी सी है दुआ
मैं बन जाऊं सबसे बड़ा
मेरे पीछे, मेरे आगे
हाथ जोड़े दुनिया भागे
बस इतना सा ख्वाब है…

शान से रहूं सदा, मुझ पे लोग हों फ़िदा
हसीनाएं भी दिल हों खोती
दिल का ये कमल खिले, सोने का महल मिले
बरसने लगे हीरे मोती
मान जा ऐ खुदा
इतनी सी है दुआ
मैं ज्यादा नहीं मांगता
सारी दौलत, सारी ताकत
सारी दुनिया पर हुकूमत
बस इतना सा ख्वाब है…

(यस बॉस)

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