बरसात का मौसम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

बरसात का मौसम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

इन दोनों के दरमियाँ कुछ रिश्ता तो है ज़रूर
हरेक बारिश में यह दिल मचलता तो है ज़रूर

शर्माते हुए छिपने की कोशिश हज़ार करता है
भीगने के बाद हुस्न और निखरता तो है ज़रूर

तमन्ना कुछ तो पहले ही जवान हुआ करती है
बेताबियाँ बढ़ाने को चांद निकलता तो है ज़रूर

इश्क़ पे क्या ज़ोर है चाहत को किसने रोका है
अरमाँ की तपिश में जिस्म जलता तो है ज़रूर

गुफ़्तुगू है ग़ैर-ज़रूरी और ख़ामोशी बे-असर
सर-गोशियों से फ़ासला सिमटता तो है ज़रूर

बरसात का मौसम भी कितना ग़ज़ब ढाता है
सराबोर हो तन-मन पर सुलगता तो है ज़रूर

फ़ितरत इसकी कैसी भी हो, यह मगर तय है
संभलने से पहले ये दिल बहकता तो है ज़रूर

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