बरवक़्त एक और ख़याल-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

बरवक़्त एक और ख़याल-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

ख़याल आता है
जैसे बच्चों की आँख बादल में
शेर और हाथी देखती है
बहुत-से लोगों ने
वक़्त में भी
शऊर बीनाई और समाअत
के वस्फ़ देखे
बहुत-से लोगों की जुस्तुजू के सफ़र का अंजाम
इस अक़ीदे की छाँव में है
कि वक़्त कहते हैं जिसको
दर अस्ल वो ख़ुदा है

मगर है जिसको तलाश सच की
भटक रहा है

ये इक सवाल
उसके ज़हनो-दिल में
खटक रहा है
ये वक़्त क्या है?

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