फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर-ग़ुब्बार-ए-अय्याम -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर-ग़ुब्बार-ए-अय्याम -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर
रंग छिड़का गया तख़्ता-ए-दार पर

बज़्म बरपा करे जिसको मंज़ूर हो
दावते-रक्स तलवार की धार पर

दावते-बैयते-शह पे मुलज़िम बना
कोई इकरार पर कोई इनकार पर

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