फूल डाल से छूट रहा है-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

फूल डाल से छूट रहा है-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

फूल डाल से छूट रहा है।

सोचा था नव नीड़ बनेगा-
मरु-स्थल में जब विकसेगा,
स्वप्न तितलियों का लेकिन बनने से पहले टूट रहा है।
फूल डाल से छूट रहा है।

निर्ममता से कुचल-कुचल कर,
तृण-तृण मिट्टी में बिखराकर,
मिट्टी की भी राख बनाकर,
कौन अरे! अज्ञात आज यों लुटे हुओं को लूट रहा है?
फूल डाल से छूट रहा है।

मधु पाने की आशा लेकर,
आया था प्यासा सुमनों पर,
खाक किंतु उनकी विलोक कर,
बरबस अलि की आंखों से आँसू का सागर फूट रहा है।
फूल डाल से छूट रहा है।

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