फिर भी जीवन से प्यार तुझे-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

फिर भी जीवन से प्यार तुझे-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

फिर भी जीवन से प्यार तुझे!

तेरी छाया पड़, जाने पर शंकित होते नभ के खग भी,
तेरी मिट्टी का भार वहन कर थक जाते चिर ज़ड़ मग भी,
फिर भी तू पागल कहता है-जीने का है अधिकार मुझे ।
इतना जीवन से प्यार तुझे!

जग की नजरें पहले तुझ पर,
जो बरसाती थीं प्यार अमर,
अब वे ही तो तेरे उर में बनतीं चिर हाहाकार तुझे।
फिर भी जीवन से प्यार तुझे!

था तू जिसके अद्भुत बल पर-
ले नाव चला भवसागर पर,
संहार बन गया है! जब बह तेरा परिचित पतवार तुझे ।
फिर भी जीवन से प्यार तुझे!

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