फिर भी जीवन-अभिलाष तुझे-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

फिर भी जीवन-अभिलाष तुझे-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

फिर भी जीवन-अभिलाष तुझे!

जब मधुबाला ने ही तुझको मदिरा में गरल प्रदान किया,
औ’ सर्वस लेकर भी तेरा मदिरालय ने अपमान किया,
फिर भी मदिरालय में जाता इतनी मदिरा की प्यास तुझे!
फिर भी जीवन-अभिलाष तुझे!

जिस पर सर्वस्व लुटा डाला,
जीवन का कोष मिटा डाला,
जब उसने ही जग के सम्मुख, रे पागल, किया निराश तुझे!
फिर भी जीवन-अभिलाष तुझे!

जिसके मद में बहता था तू,
जिसको अपना कहता था तू,
जब उससे हाय, मिला केवल जग जीवन का उपहास तुझे!
फिर भी जीवन-अभिलाष तुझे!

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