फिर पुच्छन सिध नानका मात लोक विच क्या वरतारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

फिर पुच्छन सिध नानका मात लोक विच क्या वरतारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

फिर पुच्छन सिध नानका मात लोक विच क्या वरतारा ॥
सभ सिधीं एह बुझ्या कलि तारन नानक अवतारा ॥
बाबे कहआ नाथ जी सच्च चन्द्रमा कूड़ अंधारा ॥
कूड़ अमावस वरत्या हउं भालन चड़्या संसारा ॥
पाप गिरासी पिरथमी धौल खड़ा धर हेठ पुकारा ॥
सिध छप बैठे परबतीं कौन जग कउ पार उतारा ॥
जोगी ग्यान वेहूण्यां निसदिन अंग लगायन छारा ॥
बाझ गुरू डुब्बा जग सारा ॥29॥

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