फिर जैमन रिख बोल्या जुजरवेद मथ कथा सुणावै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

फिर जैमन रिख बोल्या जुजरवेद मथ कथा सुणावै ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

फिर जैमन रिख बोल्या जुजरवेद मथ कथा सुणावै ॥
करमां उते निबड़े देही मद्ध करे सो पावै ॥
थापसि करम संसार विच करम वास कर आवै जावै ॥
सहसा मनहु न चुकई करमां अन्दर भरम भुलावै ॥
भरम वरत्तन जगत की इको माया ब्रहम कहावै ॥
जुजर वेद को मथन कर तत्त ब्रहम विच भरम भुलावै ॥
करम दिड़ाय जगत विच करम बंध कर आवै जावै ॥
सतिगुर बिना न सहसा जावै ॥10॥

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