फासले हमारे दरमियां-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

फासले हमारे दरमियां-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

फासले ये दरमियां हमारे रहेंगे कब तक ।
बता कैसे जीयें तन्हा, कैसे रहें तब तक ।

पल निकलते ही कहीं खो ना जायें सारी ख़ुशियाँ ।
तुमसे मिलते ही कहीं रो ना जायें मेरी अखियां ।
घडियां इन्तजार की खतम होगीं जब तक ।
बता कैसे जीयें तन्हा, कैसे रहें तब तक ।

मिल जाओ इस जनम अगले की आस नहीं ।
आ जाओ इक बार फिर कहीं ये सांस नहीं ।
दीदार मीलों दूरी से होता रहेगा जब तक ।
बता कैसे जीयें तन्हा, कैसे रहें तब तक ।

देख ना ले कोई मेरी तेरी बेइंतिहा तड़प को ।
लग ना जाये नज़र हमारी बेपनाह मोहब्बत को।
जिन्दा है आरजू तुझको पाने की जब तक ।
बता तन्हा जीयें कैसे, कैसे रहें तब तक ।।

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