फाग-अनुराग -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

 फाग-अनुराग -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

रजो गुण ने दिखलाया रूप
लाभ कर काल परम अनुकूल;
या हुई रंजित होली-हेतु
अवनि मंडल में उड़ती धूल।
अरुणिमा के विस्तार-निमित्त
अधार में खुला नवीन विभाग;
या हुआ घनीभूत नभ-मधय
लाल फूलों का ललित पराग।
ललाई का है हुआ विकास
लालसाओं को कर अभिराम;
या हुई जहाँ-तहाँ समवेत
लोक-लोचन लालिमा ललाम।
क्या किरण आज रह गयी लाल,
हो गयीं और रंगतें दूर;
या प्रकृति है भरती निज माँग
रति-सिंघोरा का ले सिंदूर।
बना करके कमनीय दिगंत
अवनि पर बिखरा ऊषा-राग
उड़ रहा है गुलाल सब ओर,
या हुआ मूर्त फाग-अनुराग।

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