फ़िल्मी गीत-शैलेन्द्र -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Part 5

फ़िल्मी गीत-शैलेन्द्र -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Part 5

होठों पे सच्चाई रहती है

होठों पे सच्चाई रहती है जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं
हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है !

मेहमां जो हमारा होता है वो जान से प्यारा होता है
ज़्यादा की नहीं लालच हम को थोड़े में गुज़ारा होता है
बच्चों के लिए जो धरती माँ
सदियों से सभी कुछ सहती है
हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है !

कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं, इन्सान को कम पहचानते हैं
ये पूरब है, पूरब वाले हर जान की कीमत जानते हैं
हिल-मिल के रहो और प्यार करो
इक चीज़ यही तो रहती है
हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है !

जो जिस से मिला सीखा हम ने, ग़ैरों को भी अपनाया हमने
मतलब के लिए अन्धे बनकर रोटी को नहीं पूजा हम ने
अब हम तो क्या सारी दुनिया
सारी दुनिया से कहती है
हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है !

मेरा नाम राजू घराना अनाम

मेरा नाम राजू घराना अनाम
बहती है गंगा जहाँ मेरा धाम
मेरा नाम राजू …

काम नये नित गीत बनाना
गीत बना के जहां को सुनाना
कोई न मिले तो अकेले में गाना
कविराज कहे, न ये ताज रहे
न ये राज रहे, न ये राजघराना
प्रीत और प्रीत का गीत रहे
कभी लूट सका न कोई ये खज़ाना
मेरा नाम राजू …

धूल का इक बादल अलबेला
निकला हूँ अपने सफ़र में अकेला
छुप-छुप देखूँ मैं दुनिया का मेला
काहे मान करे, अभिमान करे
नादान तुझे इक दिन तो है जाना
डफ़ली उठा आवाज़ मिला
गा मिल के मेरे संग प्रेम तराना
मेरा नाम राजू …

तितली उड़ी, उड़ जो चली

तितली उड़ी, उड़ जो चली
फूल ने कहा, आजा मेरे पास
तितली कहे, मैं चली आकाश

खिले हैं गगन में तारों के जो फूल
वहीं मेरी मंज़िल कैसे जाऊँ भूल
जहाँ नहीं बंधन, ना कोई दीवार
जाना है मुझे वहाँ बादलों के पार
तितली उड़ी, उड़ जो चली …

फूल ने कहा, तेरा जाना है बेकार
कौन है वहाँ जो करे तेरा इंतज़ार
बोली तितली दोनों पंख पसार
वहाँ पे मिलेगा मेरा राजकुमार
तितली उड़ी, उड़ जो चली …

तितली ने पूरी जब कर ली उड़ान
नई दुनिया में हुई नई पहचान
मिला उसे सपनों का राजकुमार
तितली को मिल गया मनचाहा प्यार
तितली उड़ी, उड़ जो चली …

मन भावन के घर जाए गोरी

मन भावन के घर जाए गोरी
घूँघट में शरमाए गोरी
बंधी रहे ये प्यार की डोरी
हमें ना भुलाना…

बचपन के दिन खेल गंवाए
आई जवानी तो बालम आए
तेरे आंगन बंधे बधाई गोरी
क्यों नैना छलकाए गोरी
हमें ना भुलाना…

इस दुनिया की रीत यही है
हाथ जो थामे मीत वही है
अब हम तो हुए पराए गोरी
फिर तेरे संग जाए गोरी
हमें ना भुलाना…

मस्ती भरे सावन के झूले
तुझको कसम है जो तू भूले
अब के जब वापस आए गोरी
गोद भरी ले आए गोरी
हमें ना भुलाना…

ये शाम की तन्हाइयाँ ऐसे में तेरा ग़म

ये शाम की तन्हाइयाँ ऐसे में तेरा ग़म
पत्ते कहीं खड़के हवा आई तो चौंके हम
ये शाम की तन्हाइयाँ …

जिस राह से तुम आने को थे
उस के निशाँ भी मिटने लगे
आये न तुम सौ सौ दफ़ा आये गये मौसम
ये शाम की तन्हाइयाँ …

सीने से लगा तेरी याद को
रोती रही मैं रात को
हालत पे मेरी चाँद तारे रो गये शबनम
ये शाम की तन्हाइयाँ …

रमय्या वस्तावय्या

रमय्या वस्तावय्या, रमय्या वस्तावय्या
मैने दिल तुझको दिया

नैनों में थी प्यार की रोशनी, तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी
तू और था तेरा दिल और था, तेरे मन में ये मीठी कटारी न थी
मैं जो दुख पाऊँ तो क्या, आज पछताऊँ तो क्या
मैने दिल तुझको दिया

उस देश में तेरे परदेस में, सोने चांदी के बदले में बिकते हैं दिल
इस गाँव में दर्द की छांव में, प्यार के नाम पर ही तड़पते हैं दिल
चाँद तारों के तले, रात ये गाती चले
मैने दिल तुझको दिया

याद आती रही दिल दुखाती रही, अपने मन को मनाना न आया हमें
तू न आए तो क्या भूल जाए तो क्या, प्यार करके भुलाना न आया हमें
वहीं से दूर से ही, तू भी ये कह दे कभी
मैने दिल तुझको दिया

रस्ता वही और मुसाफ़िर वही, एक तारा न जाने कहाँ छुप गया
दुनिया वही दुनियावाले वही, कोई क्या जाने किसका जहाँ लुट गया
मेरी आँखों में रहे, कौन जो तुझसे कहे
मैने दिल तुझको दिया
रमय्या वस्तावय्या, रमय्या वस्तावय्या ..

पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई

पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई
इक पल जैसे इक युग बीता
जुग बीते मोहे नींद न आई
पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई

उत जले दीपक, इत मन मेरा
फिर भी न जाए मेरे मन का अंधेरा
तड़पत तरसत उमर गँवाई
पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई

न कहीं चंदा, न कहीं तारे
जोत के प्यासे मेरे नैन बिचारे
भोर भी आस की किरण न लाई
पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई

 

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