फ़िल्मी गीत-शैलेन्द्र -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Part 6

फ़िल्मी गीत-शैलेन्द्र -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Part 6

ये चमन हमारा अपना है

ये चमन हमारा अपना है
इस देश पे अपना राज है
इस देश पे अपना राज है
मत कहो के सर पे टोपी है
कहो सर पे हमारे ताज है
कहो सर पे हमारे ताज है
ये चमन हमारा अपना है …

आती थी एक दिवाली
आती थी एक दिवाली
बरसों में कभी खुशहाली
अब तो हर एक वार एक त्यौहार है
ये उभरता सँवारता समाज है
ये चमन हमारा …

ये जान से प्यारी धरती
ये जान से प्यारी धरती
दुनिया की दुलारी धरती
ओ ये अमन का दिया आँधियों में जला
सारी दुनिया को इस पे नाज़ है
ये चमन हमारा अपना है…

हो देख लो कहीं ग़म न रहे कहीं ग़म न रहे
कहीं ग़म न रहे कहीं ग़म न रहे
ओ रोशनी कहीं कम न रहे कहीं ग़म न रहे
कहीं ग़म न रहे कहीं ग़म न रहे
सारे संसार की आँख हम पे लगी
अपने हाथों में अपनी लाज है

ये चमन हमारा अपना है
इस देश पे अपना राज है

नींदपरी लोरी गाए, माँ झुलाए पालना

नींदपरी लोरी गाए, माँ झुलाए पालना
सो जा मेरे लालना, सो जा मेरे लालना
मीठे-मीठे सपनों में खो जा मेरे लालना
नींदपरी लोरी गाए…

तूने मेरे मदभरे सपनों को रंग डाला
तेरी दोनों अँखियोँ में दुनिया का उजियाला
तू जो हँसे, झिलमिलाए दीपमाला
नींदपरी लोरी गाए …

तू ना होता ज़िंदगी में आहें होतीं सूनी-सूनी
फैली-फैली ममता की बाँहें होतीं सूनी-सूनी
होतीं मेरे दिल की राहें सूनी-सूनी
नींदपरी लोरी गाए …

जूही की कली मेरी लाडली

जूही की कली मेरी लाडली
नाज़ों की पली मेरी लाडली
ओ आस-किरन जुग-जुग तू जीए
नन्ही सी परी मेरी लाडली, ओ मेरी लाडली

धरती पे उतर आया चँदा तेरा चहरा बना
चम्पी का सलौना गुलदस्ता तन तेरा बना, ओ मेरी लाडली
कोमल तितली मेरी लाडली
हीरे की कनी मेरी लाडली, ओ आस-किरन जुग-जुग…

शर्माए दीवाली तारों की तेरे नैनों से
कोयल ने चुराई है पंचम तेरे बैनों से, ओ मेरी लाडली
गुड़िया सी ढली मेरी लाडली
मोहे लागे भली मेरी लाडली, ओ आस-किरन जुग-जुग…

हर बोल तेरा सिखलाए हमें दुख से लड़ना
मुस्कान तेरी कहती है सदा धीरज धरना, ओ मेरी लाडली
गंगा की लहर मेरी लाडली
चंचल सागर मेरी लाडली, ओ आस-किरन जुग-जुग…

मुन्ना बड़ा प्यारा, अम्मी का दुलारा

मुन्ना बड़ा प्यारा, अम्मी का दुलारा
कोई कहे चाँद, कोई आँख का तारा

हँसे तो भला लगे, रोये तो भला लगे
अम्मी को उसके बिना कुछ भी अच्छा न लगे
जियो मेरे लाल! जियो मेरे लाल!
तुमको लगे मेरी उमर, जियो मेरे लाल!
मुन्ना बड़ा प्यारा …

इक दिन वो माँ से बोला- क्यूँ फूँकती है चूल्हा
क्यूँ ना रोटियों का पेड़ हम लगालें
आम तोड़ें रोटी तोड़ें रोटी-आम खा लें
काहे करे रोज़-रोज़ तू ये झमेला
अम्मी को आई हंसी, हँस के वो कहने लगी
लाल मेहनत के बिना रोटी किस घर में पकी
जियो मेरे लाल! जियो मेरे लाल!!
ओ जियो जियो जियो जियो जियो मेरे लाल!
मुन्ना बड़ा प्यारा …

एक दिन यूँ छुपा मुन्ना, ढूंढे ना मिला मुन्ना
बिस्तर के नीचे, कुर्सियों के पीछे
देखा कोना-कोना, सब थे साँस खींचे
कहाँ गया, कैसे गया, सब थे परेशां
सारा जग ढूंढ थके, कहीं मुन्ना ना मिला
मिला तो प्यार भरी माँ की आँखों में मिला
जियो मेरे लाल! जियो मेरे लाल!!
ओ तुमको लगे मेरी उमर जियो मेरे लाल!!!
मुन्ना बड़ा प्यारा …

जब साँझ मुस्कुराये, पश्‍चिम में रंग उड़ाये
मुन्ने को ले के अम्मी दरवाज़े पे आ जाये
आते होंगे बाबा मुन्ने की मिठाई
लाते होंगे बाबा …

आवारा हूँ, आवारा हूँ

आवारा हूँ, आवारा हूँ
या गर्दिश में हूँ आसमान का तारा हूँ – २
आवारा हूँ, आवारा हूँ

घर-बार नहीं, संसार नहीं
मुझसे किसी को प्यार नहीं – २
उस पार किसी से मिलने का इक़रार नहीं
मुझसे किसी को प्यार नहीं – २
सुनसान नगर अन्जान डगर का प्यारा हूँ
आवारा हूँ, आवारा हूँ

आबाद नहीं बरबाद सही
गाता हूँ खुशी के गीत मगर – २
ज़ख्मों से भरा सीना है मेरा
हंसती है मगर ये मस्त नज़र
दुनिया sss
दुनिया में तेरे तीर का या तकदीर का मारा हूँ
आवारा हूँ, आवारा हूँ
या गर्दिश में हूँ आसमान का तारा हूँ
आवारा हूँ, आवारा हूँ

ओ रे माँझी, ओ रे माँझी

ओ रे माँझी, ओ रे माँझी, ओ ओ ओ ओ मेरे माँझी
मेरे साजन हैं उस पार, मैं मन मार, हूँ इस पार
ओ मेरे माँझी अबकी बार, ले चल पार, ले चल पार
मेरे साजन हैं उस पार

मन की किताब से तुम मेरा नाम ही मिटा देना
गुण तो न था कोई भी अवगुण मेरे भुला देना
मुझे आज की विदा का, मरके भी रहता इंतज़ार
मेरे साजन हैं उस पार …

मत खेल जल जाएगी, कहती है आग मेरे मन की
मैं बंदिनी पिया की, मैं संगिनी हूँ साजन की
मेरा खींचती है आँचल, मनमीत तेरी हर पुकार
मेरे साजन हैं उस पार …

मन रे, तू ही बता क्या गाऊँ

मन रे, तू ही बता क्या गाऊँ
कह दूँ अपने दिल के दुखड़े
या आँसू पी जाऊँ

जिस ने बरबस बांध लिया है
इस पिंजरे में क़ैद किया है
कब तक मैं उस पत्थर दिल का
जी बहलाती जाऊँ
मन रे…

नींद में जब ये जग सोता है
मैं रोती हूँ, दिल रोता है
मुख पे झूठी मुस्कानों के
कब तक रंग चढ़ाऊँ
मन रे…

 

This Post Has One Comment

Leave a Reply