प्रेम-संग्रह-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

प्रेम-संग्रह-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

मैं हूँ प्रेम में रहता वो नफरत में रहती है।

मैं हूँ प्रेम में रहता वो नफरत में रहती है।
मैं दिल मे दरिया बहाऊँ, वो दरिया से बहती है।।
अजब सी फितरत और क्या अंदाज है उसका।
जब मैं अपनी सुध खो दूँ वो बेसुध रहती है।।

अहसासों की सीमा कितनी जानी पहचानी है।

अहसासों की सीमा कितनी जानी पहचानी है।
ये तेरी भी कहानी है मेरी भी कहानी है।।
उन्हें देखते ही जब नजरों ने बगावत कर दी।
कभी इस ओर जवानी थी अभी उस ओर जवानी है।।

 

एक टीस है दिल में किसे ब्यान कर दूँ।

एक टीस है दिल में किसे ब्यान कर दूँ।
एक दिल है किसके किसके नाम कर दूँ।
चुभन चुभती है चुभ जाये क्यों इल्जाम कर दूँ।
दिल धड़कता है न धड़के बस जिंदगी तेरे नाम कर दूँ।।

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