प्रेम का स्वाद-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

प्रेम का स्वाद-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

मुझे प्रेम चखना है
जब भी पकाया, कच्चा रह गया
ज़रा बताओ ना, क्या है विधि
पक्का प्रेम पकाने की।
सुनो, अबकी लेना तुम
धरती पर अविरल बहती
नदियों जितना जल
खेतों में लहलहाती फसलों जितना अन्न
फूलों के मकरंद रस जितनी मिठास
चिरकाल से मानव को पोषित करती
गौ माताओं जितना शुद्ध घृत
धरती पर स्थित वृक्ष वनस्पतियों जितने मेवा
आकाश में उड़ते श्वेत बादलों जितना नारियल का चूरा
भोर के सूरज की चमचमाती लाल किरणों जितने केसर के रेशे
सब सामग्री एकत्रित कर उसे सागर जितनी बड़ी कढ़ाही में उड़ेलकर
सूरज के ताप जितनी समायोज्य आंच पर भून लेना
और फिर सौंप देना मिश्रण वातावरण में बहती ठंडी मधुर बयार को
उसे ‘लड्डुओं’ में बांधने के लिए
इस बार जो चखोगे तुम “प्रेम”
वो लेशमात्र भी कच्चा नहीं प्रतीत होगा!

 

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