प्रीतिभोज-अपने खेत में -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

प्रीतिभोज-अपने खेत में -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

आगरा मेडिकल कालेज की प्राचार्या
परेशान हैं बन्दरों के मारे…
उन्हें रात में नींद नहीं आती
बन्दर किस छात्र या छात्रा को
काट खायेगा, कहा नहीं जा सकता

एक नहीं, दो नहीं
बन्दरों की पूरी बटालियन
इर्द-गिर्द पेड़ों पर हमेशा
जमी रहती है…
लोग हैं कि
हनुमान के वंशजों को
अक्सर ‘प्रीतिभोज’ देते रहते हैं
लड्डुओं से भरा परात
मेडिकल कालेज के अन्दर वाले ‘द्रुमकुंजों’ के बीच
उँड़ेल जाते हैं

महीने के पहले हफ्ते वाले दो-तीन दिनों में
या प्रथम सप्ताह के पहले मंगलवार को
लगता है समूचे उत्तर प्रदेश का
मर्कट-मण्डल लड्डू भोज के लिए
आ जुटता है यहाँ….

उस रोज कोई भी
मेडिकल कालेज के अन्दर वाले परिसर में
दिखाई नहीं पड़ेगा
चार गेट-कीपर हैं
वे भी गेट के बाहर ही
दम साधे बैठे रहते हैं स्टूलों पर
अन्दर कपि समाज का
चलता रहता है प्रीतिभोज
कालेज का सभी काम-काज
बन्द रहता है उस दिन !

(23.12.95)

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