प्रार्थना-धेनुएँ-उत्सवा-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

प्रार्थना-धेनुएँ-उत्सवा-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

विश्वास करो
तुम्हारे लिए कोई अहोरात्र प्रार्थना कर रहा है।
स्मरण करो
कोई सा भी उपाधिहीन सादा सा दिन
जब तुम्हें अनायास
अपने स्वत्त्व में
किसी कृष्णगन्ध की प्रतीति हुई हो, अथवा
किसी ऐसे राग की असमाप्तता
जो तुम्हारी देह-बाँशी को
गो-वत्स की भाँति विह्वल कर गयी हो,
विश्वास करो
स्मरण के उस गोचारण में
कहीं तुम्हारे लिए
कोई प्रार्थना-धेनुएँ दुह रहा होता है।
व्यक्तित्व की यह वृन्दावनता ही प्रार्थना है।
प्रार्थना की कोई भाषा नहीं होती।
जिस उदार भाव से
वनस्पतियाँ
धरा को वस्त्रित किये रहती हैं, कीर्तन-पंक्तियों सी
दूर्वा
जिस निष्ठा से
भूमा को उत्सव किये रहती है–
क्या ये सब अनुष्टुप नहीं हैं?
यदि धूप की ब्राह्मणी
उपनिषद् नहीं है
तो फिर और कौन है?
अपने फूलों को देता हुआ
पादप
प्रार्थना ही तो करता है,
मेघों की लिखित गायत्रियाँ ही तो नदियाँ हैं।
कोई इन परंतपा
रँभाती प्रार्थना-धेनुओं को आरात्रिक दुह रहा है,
विश्वास करो
तुम्हारे लिए कोई अहोरात्र प्रार्थना कर रहा है–
वह वैष्णव है।

 

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