प्रानी नाराइन सुधि लेहि- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि रागु रामकली महला ९ -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

प्रानी नाराइन सुधि लेहि- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि
रागु रामकली महला ९ -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

प्रानी नाराइन सुधि लेहि ॥
छिनु छिनु अउध घटै निसि बासुर ब्रिथा जातु है देह ॥1॥रहाउ॥
तरनापो बिखिअन सिउ खोइओ बालपनुअगिआना ॥
बिरधि भइओ अजहू नही समझै कउन कुमति उरझाना ॥1॥
मानस जनमु दीओ जिह ठाकुरि सो तै किउ बिसराइओ ॥
मुकतु होत नर जा कै सिमरै निमख न ता कउ गाइओ ॥2॥
माइआ को मदु कहा करतु है संगि न काहू जाई ॥
नानकु कहतु चेति चिंतामनि होइ है अंति सहाई ॥3॥3॥81॥902॥

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