प्रानी कउ हरि जसु मनि नही आवै- शब्द-रागु गउड़ी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

प्रानी कउ हरि जसु मनि नही आवै- शब्द-रागु गउड़ी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

प्रानी कउ हरि जसु मनि नही आवै ॥
अहिनिसि मगनु रहै माइआ मै कहु कैसे गुन गावै ॥1॥रहाउ॥
पूत मीत माइआ ममता सिउ इह बिधि आपु बंधावै ॥
म्रिग त्रिसना जिउ झूठो इहु जग देखि तासि उठि धावै ॥1॥
भुगति मुकति का कारनु सुआमी मूड़ ताहि बिसरावै ॥
जन नानक कोटन मै कोऊ भजनु राम को पावै ॥2॥3॥219।

Leave a Reply