प्राण ! मन की बात-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

प्राण ! मन की बात-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

प्राण ! मन की बात तुम तन से न पूछो!

प्राण को तो प्राण ही बस जानता है
हदय को केवल हदय पहचानता है,
तुम विरह का दाह चुम्बन से न पूछो!
प्राण ! मन की बात तुम तन से न पूछो!

आँसुओं की बूंद कब घन ने चुनी है,
भूमि की आवाज़ नभ में अनसुनी है,
तुम धरा की प्यास सावन से न पूछो!
प्राण ! मन की बात तुम तन से न पूछो!

रूप-छवि तो आँख का छल छन्द भ्रम है,
यह परस यह दरस आकर्षण चरम है,
भक्त की तुम भक्ति दर्शन से न पूछो!
प्राण ! मन की बात तुम तन से न पूछो!

रजकणों में सिर्फ है प्रतिबिम्ब झलमल
चाँद नभ में, है घटों में नीर केवल
तुम पिया का रूप दर्पण से न पूछो!
प्राण ! मन की बात तुम तन से न पूछो!

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