प्रसारित हुआ है-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

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प्रसारित हुआ है
वरिष्ठ नेता का
त्यागपत्र।

अकारण
टूटा है
चुनाव के पूर्व सहकार;
चालू हुआ है
नया-नया
विघटन;
फूट ही पड़ा है लावा
अग्नि पहाड़ के अन्दर से;
डोल-डोल डोल गई
राजनीति;
व्याप गई
जनता में
हाड़-तोड़ हलचल;
दौड़-दौड़ दौड़ पड़ी
ओठों से कानों तक
कहा-सुनी;
नाच-नाच नाच उठीं
समाचार पत्रों में सुर्खियाँ;
धमाधम धड़की है, धड़ल्ले से धरती;
तड़क-तड़क
टूटे हैं-फूटे हैं
बड़े-बड़े
दर्प-देही दर्पण।

रचनाकाल: ०२-०२-१९७७

 

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