प्रलय की छाया-नाटकों में से लिया गया काव्य संग्रह- रचनाएँ -जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

प्रलय की छाया-नाटकों में से लिया गया काव्य संग्रह- रचनाएँ -जयशंकर प्रसाद-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaishankar Prasad

प्रलय की छाया

मीड़ मत खिंचे बीन के तार
निर्दय उँगली! अरी ठहर जा
पल-भर अनुकम्पा से भर जा,
यह मूर्च्छित मूर्च्छना आह-सी
निकलेगी निस्सार।

छेड़-छेड़कर मूक तन्त्र को,
विचलित कर मधु मौन मन्त्र को-
बिखरा दे मत, शून्य पवन में
लय हो स्वर-संसार।

मसल उठेगी सकरुण वीणा,
किसी हृदय को होगी पीड़ा,
नृत्य करेगी नग्न विकलता
परदे के उस पार।

बहुत छिपाया, उफन पड़ा अब,

बहुत छिपाया, उफन पड़ा अब,
सँभालने का समय नहीं है
अखिल विश्व में सतेज फैला
अनल हुआ यह प्रणय नहीं है

कहीं तड़पकर गिरे न बिजली
कहीं न वर्षा हो कालिमा की
तुम्हें न पाकर शशांक मेरे
बना शून्य यह, हृदय नहीं है

तड़प रही है कहीं कोकिला
कहीं पपीहा पुकारता है
यही विरुद क्या तुम्हें सुहाता
कि नील नीरद सदय नहीं है

जली दीपमालिका प्राण की
हृदय-कुटी स्वच्छ हो गई है
पलक-पाँवड़े बिछा चुकी हूँ
न दूसरा ठौर, भय नहीं है

चपल निकलकर कहाँ चले अब
इसे कुचल दो मृदुल चरण से
कि आह निकले दबे हृदय से
भला कहो, यह विजय नहीं है

चला है मन्थर गति में पवन रसीला नन्दन कानन का

चला है मन्थर गति में पवन रसीला नन्दन कानन का
नन्दन कानन का, रसीला नन्दन कानन का
फूलों पर आनन्द भैरवी गाते मधुकर वृन्द,
बिखर रही है किस यौवन की किरण, खिला अरविन्द,
ध्यान है किसके आनन का
नन्दन कानन का, रसीला नन्दन कानन का ।।

उषा सुनहला मद्य पिलाती, प्रकृति बरसाती फूल,
मतवाले होकर देखो तो विधि-निषेध को भूल,
आज कर लो अपने मन का।
नन्नद कानन का, रसीला नन्दन कानन का ।।

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