प्रयाग की शाम-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

प्रयाग की शाम-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

यह गर्मी की शाम
इसका बालम बिछुड़ गया है
…इसका बालम बिछुड़ा जब से
उखड़ गये हैं शायद सुख-सपनों के डेरे
…आज हुई पगली
प्रयाग की सड़क-सड़क पर
गली-गली में
घूम रही है लम्बे काले बाल बिखेरे
(घोर उदासी भरी, पसीने से तर)
है बेहद बदनाम !
यह प्रयाग की शाम !

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