प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में।
कोई दौलत में कोई शोहरत में कोई फंसा जंजाल में ।।

इस जाल के अंदर कम है खुशियां, मुक्ति जाल के पार है।
इस मायाजाल को रचने वाला, बैठा गगन के पार है।।
राम नाम की शक्ति इतनी, कितने तरे इस नाम में ।।

प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में।
कोई दौलत में कोई शोहरत में कोई फंसा जंजाल में।

जिन पैरों से तरी अहिल्या मुनि शाप उन्हें वरदान लगा।
माया में जब उल्झे नारद प्रभु को नारद शाप लगा।
राम रूप में आए प्रभु तब पाप मिटाने संसार में।

प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में ।
कोई दौलत में कोई शौहरत में कोई फंसा जंजाल में ।।

जिस धाम में बैठे हनुमंत, अजर अमर वरदान मिला ।
सरयू जी मे लुप्त हुये प्रभु तब सरयू को मान मिला।
यह नगरी प्रभु प्रिय धाम आके पाप मिटे इस धाम में

प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में
कोई दौलत में कोई शौहरत में कोई फंसा जंजाल में।।

 

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