प्रतीति-कविता-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta 

प्रतीति-कविता-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

 

कोई आने को है
इस संभावना मात्र से
तुम—
हरिण-सी चौंक कर
अपने एकांत में
हठात् स्मृति-सी लौट जाती हो।
कुछ क्षण को
परदे के घुँघरू
बलात् कुछ बोलने लगते हैं
और फिर नीरव हो जाते हैं
अभी-अभी का तुम्हारा होना—
हवा में
केवल एक क्षीण सुगंध-सा
कहीं थरथरा रहा होता है, बस—
और सब शांत हो जाता है।
लेकिन—
ऐसी भी क्या चौंकना प्रिया! कि
मेरे वक्षस्थल पर
अपने नयन तक छोड़ गईं।

ये मिथुन-नयन
मेरी आँखों में
मेरे व्यक्तित्व में
समय के मेरे समस्त आकाशों में
विवश पाखी से तिरने लगते हैं
और
अपनी और ताकते हुए
रसलीन के दोहे वाले
ये नेत्र
पहली बार मुझे भी कविता लगते हैं।

 

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