प्रतीक्षा-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

प्रतीक्षा-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

जब तुमसे मिलने हर शाम
दिन की कड़ी धूप सह लेते
तुम्हारे साथ चार कदम चल लेते
और सारी रात खुली आँखों में रह जाते

हमेशा आँखों में तुम्हारी प्रतीक्षा रहती
छत पर जा तुम्हारी ही राह देखते
जब भी तुम दरवाजे पर दस्तक देती
आंसू भरे तुम्हे बाँहों में भींच लेते

कितना अनिश्चित था सब कुछ
फिर भी मन में दबा कुछ विश्वास था
दोबारा मिलने की दूरियां बहुत थी
पर जी गए, तुम्हारा प्यार जो आस-पास था

तुमसे कभी मन भरा नहीं
कुछ देर और ठहर जाता दिन
तुम्हारा स्पर्श, रूप, रस सब कुछ बटोर कर
मांग लेता ईश्वर से तुम्हे नित-दिन

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