प्रतीक्षा-इत्यलम् अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

प्रतीक्षा-इत्यलम् अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

नया ऊगा चाँद बारस का,
लजीली चाँदनी लम्बी,
थकी सँकरी सूखती दीर्घा:

चाँदनी में धूल-धवला बिछी लम्बी राह।
तीन लम्बे ताल, जिन के पार के लम्बे कुहासे को
चीरती, ज्यों वेदना का तीर, लम्बी टटीरी की आह।
उमड़ती लम्बी शिखा-सी, यती-सी धूनी रमाये

जागती है युगावधि से सँची लम्बी चाह-
और जाने कौन-सी निव्र्यास दूरी लीलने दौड़ी
स्वयं मेरी निज लम्बी छाँह!

शिलङ्, 1945

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