प्रणाम- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

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भोर
नील के पटल पर एक नाम
ओस में खिल आते हैं सूर्य
प्रकाश! प्रणाम।

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