प्रणय – निवेदन: फिर उपजेगा अधिकार नया-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

प्रणय – निवेदन: फिर उपजेगा अधिकार नया-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

मैं टूटे फूटे शब्द लिए,
कुछ इस कवि के, कुछ उस कवि के,
लाया हूँ अपने छंदों में,
अर्पित करता फिर एक बार,
स्वीकार करो तो अच्छा है,
स्वीकार न हो, तो !!

रख देना अपने पास उन्हें
पैरों के पीछे, रद्दी में,
यदि वापस कर दोगे मुझको,
फिर शब्द चुराकर लिख दूंगा,
फिर उपजेगा अधिकार नया..

कुछ भूले भाले संस्मरण,
थोड़े सच, थोड़े सपने हैं,
लाया हूँ अपने होंठो पर,
अस्फुट शब्दों में रख दूंगा,
यदि समझोगे तो अच्छा है,
यदि ना समझो तो !!

हँस लेना मेरे जाने पर
कहकर, उन्मादित है कोई!
यदि हंस दोगे मेरे आगे,
प्रतिदान समझ कर रख लूंगा,
स्मरण कभी फिर होगा यह,
फिर उपजेगा अधिकार नया..

अंतिम साँसें आते आते,
यदि कभी देखने आये तुम
उखड़ी साँसों को वहीं रोक
आँखों आँखों में पूंछूंगा,
हाँ बोलोगे तो अच्छा है,
ना बोलोगे तो !!

फिर लेना होगा जन्म मुझे,
फिर प्रणय-निवेदन करने को,
फिरना होगा गलियों गलियों,
फिर तुम्हे कहीं पाना होगा,
और मेरी कहानी सुनने को,
तुमको फिर आना होगा,
फिर उपजेगा अधिकार कहीं,
फिर उपजेगा अधिकार नया..

 

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